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Showing posts from May, 2020

मानव जीवन का मूल उद्देश्य

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मानव जीवन आध्यात्मिक जानकारी के बिना अधूरा है मानव जीवन परमात्मा की शास्त्राविधि अनुसार साधना करके मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्राप्त होता है। पाप कर्म का कष्ट भक्ति में बाधा करता है। उदाहरण के लिए पाप कर्म के कारण शरीर में रोग हो जाना, पशु धन में तथा फसल में हानि हो जाना। ऋण की वृद्धि करता है। ऋणी व्यक्ति दिन-रात चिंतित रहता है। वह भक्ति नहीं कर पाता। पूर्ण सतगुरू से दीक्षा लेने के पश्चात् परमेश्वर उस भक्त के उपरोक्त कष्ट समाप्त कर देता है। तब भक्त अपनी भक्ति अधिक श्रद्धा से करने लगता है। परमात्मा पर विश्वास बढ़ता है, दृढ़ होता है। परंतु भक्त को परमात्मा के प्रति समर्पित होना चाहिए। जैसे पतिव्रता स्त्री अपने पति के अतिरिक्त किसी अन्य पुरूष को कामपूर्ति (Sexual Satisfaction) के लिए स्वपन में भी नहीं चाहती चाहे कोई कितना ही सुंदर हो। उसका पति अपनी पत्नी को हरसंभव कोशिश करके सर्व सुविधाऐं उपलब्ध करवाता है। विशेष प्रेम करता है। इसी प्रकार दीक्षा लेने के पश्चात् आत्मा का संयोग परमात्मा से होता है। गुरू जी आत्मा का विवाह परमात्मा से करवा देता है। यदि वह मानव शरीरधारी आत्मा अपने पति परमेश...

सत्संग से शराब छूट जाती है।

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 आज के समय में मानव समाज में बहुत सारी बुराइयां पनप चुकी हैं। जिसमें एक बहुत बड़ी बुराई है शराब पीना। शराब पीना आजकल समाज में आम बात हो गई है किसी भी खुशी के अवसर पर और किसी परेशानी का निराकरण मानकर । शराब पीने से मनुष्य को शारीरिक हानि तो होती है आर्थिक हानि भी होती है और उसका दुष्प्रभाव उसके भविष्य पर भी पड़ता है आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो आने वाली जीवन पर बहुत कष्ट होते हैं सत्संग के जरिए उसको भूत वर्तमान भविष्य की आध्यात्मिक जानकारी प्राप्त होती है जिसकी जानकारी उसे कतई नहीं होती है सत्संग के जरिए यह सारी जानकारी उसे मिलती है और सच्चे गुरु के सत्संग उसमें यह बुराई छोड़ने की बार-बार प्रेरणा होती है। आज के वर्तमान समय के अंदर पूरे विश्व में सिर्फ संत रामपाल जी महाराज जी उस परमात्मा के भेजे हुए नुमाइंदे यानी कि सच्चे संत हैं, सतगुरु हैं। संत रामपाल जी महाराज के सत्संग की अधिक जानकारी के लिए आप वेबसाइट https://www.jagatgururampalji.org पर जा सकते हैं । आध्यात्मिक जानकारी से भरपूर पुस्तक ज्ञान गंगा, जीने की राह, गीता तेरा ज्ञान अमृत पुस्तक पढ़ सकते हैं जो मानव...