मानव जीवन का मूल उद्देश्य

मानव जीवन आध्यात्मिक जानकारी के बिना अधूरा है

मानव जीवन परमात्मा की शास्त्राविधि अनुसार साधना करके मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्राप्त होता है। पाप कर्म का कष्ट भक्ति में बाधा करता है। उदाहरण के लिए पाप कर्म के कारण शरीर में रोग हो जाना, पशु धन में तथा फसल में हानि हो जाना। ऋण की वृद्धि करता है। ऋणी व्यक्ति दिन-रात चिंतित रहता है। वह भक्ति नहीं कर पाता। पूर्ण सतगुरू से दीक्षा लेने के पश्चात् परमेश्वर उस भक्त के उपरोक्त कष्ट समाप्त कर देता है। तब भक्त अपनी भक्ति अधिक श्रद्धा से करने लगता है। परमात्मा पर विश्वास बढ़ता है, दृढ़ होता है। परंतु भक्त को परमात्मा के प्रति समर्पित होना चाहिए। जैसे पतिव्रता स्त्री अपने पति के अतिरिक्त किसी अन्य पुरूष को कामपूर्ति (Sexual Satisfaction) के लिए स्वपन में भी नहीं चाहती चाहे कोई कितना ही सुंदर हो। उसका पति अपनी पत्नी को हरसंभव कोशिश करके सर्व सुविधाऐं उपलब्ध करवाता है। विशेष प्रेम करता है। इसी प्रकार दीक्षा लेने के पश्चात् आत्मा का संयोग परमात्मा से होता है। गुरू जी आत्मा का विवाह परमात्मा से करवा देता है। यदि वह मानव शरीरधारी आत्मा अपने पति परमेश्वर के प्रति पतिव्रता की तरह समर्पित रहती है यानि पूर्ण परमात्मा के अतिरिक्त अन्य किसी देवी-देवता से मनोकामना की पूर्ति नहीं चाहती है तो उसका पति परमेश्वर उसके जीवन मार्ग में बाधक सब पाप कर्मों के काँटों को बुहार देता है। उस आत्मा की जीने की राह सुगम व बाधारहित हो जाती है। उस आत्मा के लिए परमात्मा क्या करता है? उसको संत गरीबदास जी ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त ज्ञान को इस प्रकार बताया है :-
गरीब, पतिव्रता जमीं पर, ज्यों-ज्यों धरि है पाँवै।
समर्थ झाड़ू देत है, ना काँटा लग जावै।।

कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि :-
कबीर, साधक के लक्षण कहूँ, रहै ज्यों पतिव्रता नारी।
कह कबीर परमात्मा को, लगै आत्मा प्यारी।।
पतिव्रता के भक्ति पथ को, आप साफ करे करतार।
आन उपासना त्याग दे, सो पतिव्रता पार।।



वह परमात्मा आज इस धरती पर आया हुआ है और सब के कल्याण हेतु आध्यात्मिक मार्ग की पवित्र पुस्तकों सभी धर्मों के शास्त्रों के अनुसार सत्य साधना बता कर सबको यहां सुखी और मोक्ष कराने के उद्देश्य से सत मार्ग बता रहे हैं ।



उनकी अधिक जानकारी के लिए आप देख सकते हैं:-

साधना टीवी पर शाम 7:30 से और ईश्वर टीवी पर रात्रि 8:30 से ।

उनकी लिखी हुई पुस्तक भी आप पढ़ सकते हैं :-
ज्ञान गंगा।
गीता तेरा ज्ञान अमृत।
जीने की राह।
अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान।
भक्ति से भगवान तक।
गरिमा गीता की।


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